माँ बाप भगवान् नहीं हैं- तो क्या है वो आखिर ?। एक गहरी सोच

कुछ लोग शायद मेरी इस बात को सुनकर चौंक जाएंगे, पर मेरी बात किसी विरोध में नहीं है, बल्कि माँ-बाप के महत्त्व की है।

जी हाँ मेरे माँ बाप मेरे भगवान् नहीं हैं, बल्कि वो मेरी सबसे बड़ी और पहली जिम्मेदारी हैं।  क्योकि मेरी किसी इच्छा की पूर्ति ना  होने पर में शायद भगवान् को मानना बंद कर दू, मंदिर जाना छोड़ दू , या शायद एक भगवान् से दूसरे भगवान् पर शिफ्ट हो जाऊ, क्योकि भगवान तो अनदेखे हैं, और उनकी पूजा इंसान परिस्थितियों के हिसाब से बदल भी सकता है।

पर मेरे माँ-बाप वे हैं जिन्हें मैंने हर पल अपने साथ पाया है इसलिए जब तक मे जिन्दा हूँ , तब तक अपने माँ बाप का ध्यान रखने से बड़ी जिम्मेदारी दूसरी कोई नहीं है मेरे लिए।  मेरे लिए सबसे बड़ा धर्म है की जिनकी वजह से मेरा अस्तित्व है, मेरे जीते जी उन्हें कोई दुःख ना सताये, और उनका जीवन यापन अच्छे से हो।  हां जानता हु मे ये की दुखो का कोई अंत नहीं है जब तक ये जीवन है, पर अपने माँ बाप को  खुश रखने की और जीवन भर अच्छे से उनकी देखभाल करने का हर संभव प्रयास करूँगा में।  मैं हर संभव कोशिश करूँगा कि मेरे रहते मेरे माता-पिता को कोई कष्ट हो और उनका जीवन सुगम हो।

वैसे भी भगवान् तो सबके होते है, हर एक जीव सामान है उनके लिए तो। भगवान् तो हर जीव पर कृपा करते है, पर मेरे माँ बाप सिर्फ मेरे है , मेरी हर छोटी परेशानी मे वो मेरे साथ थे, मेरी हर ख़ुशी उन्ही की वजह से है, तो मेरी पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदाररी भी तो वही है। भगवान् ने और प्रकर्ति ने मिलकर तो शायद एक जीव बनाया था, पर मुझे इंसान सिर्फ मेरे माँ बाप ने बनाया है।  

ऐसा नहीं है कि मेरी कभी नाराज़गी नहीं होती मेरे माँ-बाप के साथ, वो तो जीवन का नियम है कि साथ रहेंगे तो कभी-कभी मतभेद भी होंगे। पर नाराज़गी चाहे जितनी हो, उनके प्रति मेरा प्यार, सम्मान और फर्ज़ कभी कम नहीं हो सकता। और मेरी इच्छाओ, मेरी खुशियों और मेरी किसी भी और सोच से पहले मेरा फ़र्ज़ है की मे उनके अस्तित्व की परवाह करू जिनकी वजह से आज मेरा अस्तित्व है 

इसीलिए तो मेरे माँ बाप मेरे भगवान नहीं है बल्कि वो मेरी सबसे बड़ी और पहली जिम्मेदारी है और अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए में अपने जीवन तक को दाँव पर लगा सकता हूँ।